क्या है यह अनोखी अदालत?
भंगाराम देवी मंदिर में लगने वाली यह अदालत एक पारंपरिक तरीका है, जहां ग्रामवासी अपने देवी-देवताओं की शिकायतें दर्ज कराते हैं। यह शिकायतें मन्नत पूरी न होने, फसल खराब होने, पशुओं की बीमारी या महामारी जैसी समस्याओं से जुड़ी होती हैं।
कैसे काम करती है यह अदालत?
इस अदालत में ग्रामवासी अपने देवी-देवताओं की शिकायत लेकर पहुंचते हैं। देवी-देवताओं को आरोपी बनाया जाता है और उनकी पेशी होती है। भंगाराम देवी की अदालत में सुनवाई होती है और दोषी पाए जाने पर सजा सुनाई जाती है। सजा के रूप में देवी-देवताओं का मंदिर से निष्कासन या अनिश्चितकालीन निष्कासन हो सकता है।
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क्यों महत्वपूर्ण है यह अदालत?
यह अदालत छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह दर्शाता है कि कैसे लोग अपने देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और विश्वास रखते हैं। साथ ही, यह अदालत ग्रामवासियों को अपनी समस्याओं का समाधान पाने का एक पारंपरिक तरीका प्रदान करती है।
कौन हैं भंगाराम देवी?
भंगाराम देवी इस अदालत की मुख्य देवी हैं। उनकी आराधना सैकड़ों ग्रामों में की जाती है। माना जाता है कि वह वारंगल से आई थीं और बस्तर जिले में बस गईं। उनकी अदालत में देवी-देवताओं की पेशी होती है और वह न्याय करती हैं।
कैसे पहुंचते हैं देवी-देवता अदालत में?
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