1 फरवरी 2026 से महंगे होंगे सिगरेट, बीड़ी और पान-मसाला, जानें कितनी बढ़ेंगी कीमतें

Budget 2026: अगर आप सिगरेट, बीड़ी, पान-मसाला या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। 1 फरवरी 2026 से देशभर में तंबाकू उत्पाद महंगे हो जाएंगे। सरकार ने इन उत्पादों पर कर और अधिभार बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

दरअसल, जीएसटी परिषद ने 3 सितंबर 2025 को कर की नई दरों की घोषणा की थी। अधिकतर वस्तुओं पर नई दरें 22 सितंबर 2025 से लागू हो गई थीं, लेकिन तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी और पान-मसाला जैसे उत्पादों पर ये दरें 1 फरवरी 2026 से लागू होंगी। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक इन उत्पादों की खपत को हतोत्साहित करना है।


नई व्यवस्था के तहत जीएसटी में तंबाकू उत्पादों पर जो पुराना अधिभार था, उसे हटाया जाएगा, लेकिन उसकी जगह नए स्वास्थ्य अधिभार और बढ़ा हुआ उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। बीड़ी, सिगरेट और हुक्का-चुरुट में इस्तेमाल होने वाले तंबाकू पर उत्पाद शुल्क 64 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं तंबाकू के अपशिष्ट पर शुल्क 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत होगा।


सिगार, चुरुट और सिगरिलोज पर उत्पाद शुल्क में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। इसे 12.5 प्रतिशत या प्रति हजार 4,006 रुपये से बढ़ाकर 25 प्रतिशत या प्रति हजार 5,000 रुपये कर दिया गया है। बिना फिल्टर वाले 65 मिमी तक के सिगरेट पर शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर 2,700 रुपये प्रति हजार स्टिक किया जाएगा। वहीं 65 से 70 मिमी तक के सिगरेट पर शुल्क 250 रुपये से बढ़ाकर 4,500 रुपये प्रति हजार स्टिक हो जाएगा।


फिल्टर वाले सिगरेट पर भी अब लंबाई के हिसाब से ज्यादा टैक्स देना होगा। जहां पहले यह 440 से 735 रुपये प्रति हजार स्टिक था, वहीं अब इसे 3,000 रुपये से 11,000 रुपये प्रति हजार स्टिक तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। चबाने वाले तंबाकू और जर्दा पर कर की दर 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की तैयारी है।


जीएसटी के तहत बीड़ी पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा, जबकि पान-मसाला, सिगरेट, सिगार और अन्य निर्मित तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा अधिनियम भी 1 फरवरी से लागू होगा, जिसके तहत पान-मसाला फैक्ट्रियों पर विशेष उपकर लगाया जाएगा। यह उपकर मशीनों की क्षमता और हाथ से पैकेजिंग के आधार पर तय किया जाएगा।


रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार, इन बढ़े हुए करों और शुल्कों की वजह से अगले वित्त वर्ष में सिगरेट की बिक्री में 6 से 8 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। क्रिसिल का कहना है कि 1 फरवरी से सिगरेट की लंबाई के अनुसार प्रति स्टिक 2.05 रुपये से 8.5 रुपये तक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क देना होगा। इससे कंपनियों के मुनाफे में 2 से 3 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, हालांकि उनकी स्थिति फिर भी मजबूत बनी रहेगी।


कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम स्वास्थ्य के नजरिए से बड़ा फैसला माना जा रहा है, लेकिन इसका सीधा असर उपभोक्ताओं और तंबाकू उद्योग दोनों पर पड़ेगा।